Shashi Kumar Verma
Saturday, December 29, 2018
मेरी जान ए तमन्ना
मेरी जान ए तमन्ना इस जहां में हूर जैसी हो
खिला है बाग उसमें तुम कमल का फूल जैसी हो
खुदी हुस्नो शबाबो पे मगर मगरूर क्यूं इतना
तुम्हें घर हम न देंखे तो जहां में घूर जैसी हो
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